!!आत्मचिंतन!! एक आदमी रात को झोपड़ी में बैठकर एक छोटे से दीये को जलाकर सत शास्त्र पढ़ रहा था। आधी रात बीत गई जब वह थक गया तो फूंक मार कर उसने दीया बुझा दिया। लेकिन वह यह देख कर हैरान हो गया कि जब तक दीया जल रहा था, पूर्णिमा का चांद बाहर खड़ा रहा। लेकिन जैसे ही दीया बुझ गया तो चांद की किरणें उस कमरे में फैल गई। वह आदमी बहुत हैरान हुआ यह देख कर कि एक छोटे से दीए ने इतने बड़े चांद को बाहर रोेक कर रक्खा। इसी तरह हमने भी अपने जीवन में अहंकार के बहुत छोटे-छोटे दीए जला रखे हैं जिसके कारण परमात्मा की पहचान व चांद रूपी तत्वज्ञान बाहर ही खड़ा रह जाता है, आत्मा में प्रवेश नहीं कर पाता...