परनारी पैनी छुरी, तीन ठौर से खाय। धन हरे, यौवन हरे, अंत नरक ले जाए।। परनारी पैनी छुरी, तीन ठौर से खाय। धन हरे, यौवन हरे, अंत नरक ले जाए।। कबीर परमेश्वर ने कहा है :- कि नारियों को भगवान ने सुन्दर और मोहक बनाया है और पुरुषों का काम है कि उनके मोह में उलझे बिना अपना काम करें जिसने भी स्त्रियों के रूप जाल और मोहनी अदाओं पर अपने मन और नैनों को भटकाया उसका नाश तय है। कबीर परमेश्वर ने कहा है :- पर_नारी_पैनी_छुरी__मति_कोई_करो_प्रसंग ! रावण_के_दस_शीश_गये_पर_नारी_के_संग !! इस बात को हर कोई जानता है कि रावण ने पर स्त्री यानी भगवान राम की पत्नी सीता का हरण किया था ! परिणाम आपके सामने है कि रावण ने अपने एक लाख पुत्र व सवा लाख पौत्रों (नाती)के साथ अपने वंश का नाश करवा लिया ! इतिहास और पुराणों में इस तरह की कई कथाएं मौजूद हैं देवी अहिल्या पर कुदृष्टि रखने के कारण देवराज इन्द्र को अपना सिंहासन गवाना पड़ा था। वर्तमान में भी आपने ऐसी कई घटनाएं सुनी होगी की पर स्त्री सम्बंध के कारण कई परिवार तबाह हो गए इसलिए कबीर साहिब जी ने परस्त्रियों को पैनी छुरी कहा है क्योंकि ये कभी रोकर तो कभी हँ...
www.jagatgururampaljiorg.com Story of sant ravidas ji A Pandit ji used to go to bathe in the Ganges everyday, Sant Ravidas Ji shop was on the way. In which he used to sew shoes, Sant Ravidas ji was from Chamar Jaati, hence Pandit ji called him Shudra. Ram would go away from Ram, and one day Panditji's shoes broke, so I thought I would get Sant Ravidas made. On the way to Ganga bath, Ravidas stopped in front of ji's shop and said Ravidas make our shoes. Are broken Pandit ji did not go to him. He stood on the road. Ravidas ji said, Pandit ji sit till I make your gathering, Pandit ji did not say Ravidas I do not come near Shudra. I will be polluted by coming to you. You make me a shoe. Take whatever wages you have. Ravidas ji said ok Pandit ji, Sant Ravidas ji made a shoe and asked Pandit ji, are y...
!! आम का पेड़ !! ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ एक समय की बात है गौतम बुद्ध किसी उपवन में विश्राम कर रहे थे। तभी बच्चों का एक झुंड आया और पेड़ों पर पत्थर मारकर आम तोड़ने लगा। तभी एक पत्थर बुद्ध के सिर पर लगा और सिर से खून बहने लगा। बुद्ध की आँखों में आंसू आ गये। बच्चों ने देखा तो भयभीत हो गये और उन्हें लगा कि अब बुद्ध उन्हें भला-बुरा कहेंगे। बच्चों ने उनके चरण पकड़ लिए और उनसे क्षमा याचना करने लगे। उनमें से एक बच्चे ने कहा, “हमसे भारी भूल हो गई है, हमारी वजह से आपको पत्थर लगा और आपके आंसू आ गये, हमें माफ़ कर दें अब हमसे ऐसी गलती नहीं होगी!” इस पर बुद्ध ने उन्हें समझाते हुए कहा, “बच्चों, मैं इसलिए दुःखी हूँ कि तुमने आम के पेड़ पर पत्थर मारा तो पेड़ ने बदले में तुम्हे मीठे फल दिए, लेकिन मुझे मारने पर मैं तुम्हें सिर्फ भय दे सका।” सच है महापुरुषों का जीवन केवल परमार्थ के लिए ही होता है, खुद को तकलीफ पहुँचने के बावजूद भी वे सिर्फ दूसरों की ख़ुशी के बारे में ही सोचते हैं और ऐसे लोग ही महामानव कहलाते हैं। शिक्षा:- हमें भी भगवान बुद...
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Sat bhgti ki sahi vidi Jane ke liye hum se Jude