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कौन है वर्तमान में कबीर साहेब जैसा सतगुरु? आज इस पूरी पृथ्वी पर सिर्फ संत रामपाल जी महाराज ही वह पूर्ण सतगुरु है जो कि कबीर परमेश्वर जी का ज्ञान सभी आत्माओं को पहुंचा सकते हैं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई सतभक्ति करने से मनुष्य का पूर्ण मोक्ष हो सकता है तथा परमात्मा प्राप्ति हो सकती है। कबीर साहेब जी की आगे की लीलाओं को जानने के लिए कृपया संत रामपाल जी महाराज का सत्संग अवश्य देखें इन चैनलों पर 👇 साधना चैनल पर शाम 07:30 बजे ईश्वर चैनल पर सुबह 6:00 बजे श्रद्धा चैनल पर दोपहर 02:00 बजे

सत भगती की सही राह

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यजुर्वेद अध्याय 40 के मंत्र 10 से 13 मैं प्रमाण है कि वह परमात्मा जन्म लेता है अथवा अवतार लेता है उसकी जानकारी धीरा नाम तत्वदर्शी संत से पूछिए वही बताएंगे वो परमात्मा परमात्मा के बारे में ज्ञान उपदेश करेंगे वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज जी हैं वह तत्वदर्शी संत है जो सारे वेदों पुराणों से प्रमाणित शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना बताते हैं और मूल मंत्र भी प्रदान करते हैं                           
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#कबीरसागर_का_सरलार्थPart113 अघासुर युग की कथा है। Part-B ‘‘सतगुरू-उवाच‘‘ परमेश्वर जी ने कहा कि हे जलरंग! मैं तो युग-युग में आता हूँ। मैं अमर हूँ। आप तो नाशवान हैं। एक समय मेरे से एक कुष्टम पक्षी मिला था। वह भी इसी ब्रह्माण्ड में रहता है। वह कह रहा था कि मैं असंख्य युग से रह रहा हूँ। उसने बहुत पुरानी बातें बताई। ‘‘जलरंग-उवाच‘‘ यह बात सुनकर जलरंग ने कहा कि जब महाप्रलय होती है, तब वह कुष्टम पक्षी कहाँ रहता है? वह भी नष्ट हो जाता होगा? उस पक्षी को मुझे दिखाओ। ‘‘सतगुरू-वचन‘‘ कुष्टम पक्षी ने मुझे बताया कि मैंने 27 हजार महाप्रलय देखी हैं। कबीर परमेश्वर बता रहे हैं कि मेरे को कुष्टम पक्षी ने बताया कि हे जलरंग! तुम सत्य मानो। जलरंग ने कहा कि मेरे को कुष्टम पक्षी के दर्शन कराओ। यह बात सुनकर विमान में बैठकर मैं तथा जलरंग कुष्टम पक्षी के लोक में गए। हमारे साथ करोड़ों जीव भी गए जो जलरंग के शिष्य बने थे। वहाँ के बुद्धिमान हंस हमसे मिले। कुष्टम पक्षी 50 युग से समाधि लगाए था। कुष्टम पक्षी के गणों (सेवादारों) ने कुष्टम पक्षी को हमारे आने की सूचना दी। कहा कि दो महापुरूष आए हैं। उनके साथ करोड़ों जीव भी आ...

कुसंगति

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              कुसंगति एक घड़ी की संगत का फल  पद्मपुराण में एक कथा है- एक बार एक शिकारी शिकार करने गया, शिकार नहीं मिला, थकान हुई और एक वृक्ष के नीचे आकर सो गया। पवन का वेग अधिक था, तो वृक्ष की छाया कभी कम-ज्यादा हो रही थी, डालियों के यहाँ-वहाँ हिलने के कारण। वहीं से एक अतिसुन्दर हंस उड़कर जा रहा था, उस हंस ने देखा की वह व्यक्ति बेचारा परेशान हो रहा हैं, धूप उसके मुँह पर आ रही हैं तो ठीक से सो नहीं पा रहा हैं, तो वह हंस पेड़ की डाली पर अपने पंख खोल कर बैठ गया ताकि उसकी छाँव में वह शिकारी आराम से सोयें। जब वह सो रहा था तभी एक कौआ आकर उसी डाली पर बैठा, इधर-उधर देखा और बिना कुछ सोचे-समझे शिकारी के ऊपर अपना मल विसर्जन कर वहाँ से उड़ गया। तभी शिकारी उठ गया और गुस्से से यहाँ-वहाँ देखने लगा और उसकी नज़र हंस पर पड़ी और उसने तुरंत धनुष बाण निकाला और उस हंस को मार दिया। हंस नीचे गिरा और मरते-मरते हंस ने कहा:- मैं तो आपकी सेवा कर रहा था, मैं तो आपको छाँव दे रहा था, आपने मुझे ही मार दिया? इसमें मेरा क्या दोष? उस समय उस पद्मपुराण के शिकारी ने कहा: यद्यपि आपका जन्म उच...

The whole game is of the imagination of the mind

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A woman said to her husband while dying, "I love you very much and do not want to leave you, do not marry again after I leave, if you do this then I will come as a ghost and trouble you"  The young woman died, her husband respected her last wish for 3 months, after the fourth month he met a young woman and fell in love with her and soon the two became engaged. But on the night of the engagement, a ghost appeared and started accusing the man of breach of promise, after that the same routine continued. The ghost would come every night at night and accuse him of disobedience! The ghost was so clever that he could tell every single thing that happened between the man and his wife. When the man got upset with the ghost, someone advised him to go to a Jain guru in the village with a problem.  He went to the shelter of the Jain Guru, the Jain Guru was actually a Psychologist too, he told his whole story to that Jain Guru, then the Jain Guru said, "Okay! So your wife has beco...

गुरु भगवान

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"गुरु दर्श की महिमा" 🌷🙏🌹 सत्संग में समय मिलते ही आने की कोशिश करे तथा सत्संग में नखरे (मान-बड़ाई) करने नहीं आवे। अपितु अपने आपको एक बीमार समझ कर आवे। जैसे बीमार व्यक्ति चाहे कितने ही पैसे वाला हो, चाहे उच्च पदवी वाला हो जब हस्पताल में जाता है तो उस समय उसका उद्देश्य केवल रोग मुक्त होना होता है।  जहाँ डॉक्टर लेटने को कहे लेट जाता है, बैठने को कहे बैठ जाता है, बाहर जाने का निर्देश मिले बाहर चला जाता है। फिर अन्दर आने के लिए आवाज आए चुपके से अन्दर आ जाता है। ठीक इसी प्रकार यदि आप सतसंग में आते हो तो आपको सतसंग में आने का लाभ मिलेगा अन्यथा आपका आना निष्फल है। सतसंग में जहाँ बैठने को मिल जाए वहीं बैठ जाए, जो खाने को मिल जाए उसे परमात्मा कबीर साहिब की रजा से प्रसाद समझ कर खा कर प्रसन्न चित्त रहे। कबीर, संत मिलन कूं चालिए, तज माया अभिमान।  जो-जो कदम आगे रखे, वो ही यज्ञ समान।। कबीर, संत मिलन कूं जाईए, दिन में कई-कई बार।  आसोज के मेह ज्यों, घना करे उपकार।। कबीर, दर्शन साधु का, परमात्मा आवै याद।  लेखे में वोहे घड़ी, बाकी के दिन बाद।। कबीर, दर्शन साधु का, मुख पर बसै सुहाग। ...

गलत को गलत कहने की क्षमता नही तो आपकी प्रतिभा व्यर्थ है

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करनी भुगते आपनी , नाना बिधि की मार ॥ गरीब , चौदा कोटि भयंकरम , चौदा मुनि दिवान । कोटि कोटि ताबै किये , साईं का फुरमान ॥ गरीब , रुधिर भरे जहाँ कुंड हैं , कुंभी जिनका नाम । दवारा हैं मुख लोड का , बड़ा भयंकर धाम ॥ गरीब , सो सो योजन कुंड है , गिरद गता बहु भीर । कोट्यो जिव उसारिये , कहिं न पावै थीर ॥ गरीब , हाथ पैर जिनके नहीं , नहीं शीश मुखद्वार । तलछू माछू होत हैं , परै गैब की मार ॥ गरीब , लघुसी बानी कहत हूँ , दीरघ कही न जाय । जम किंकर की मार से , साईं लेत छुड़ाय ॥ गरीब , नीले जिनके होंठ हैं , काली जिनकी जीभ । चिसमे जिनके लाल है , रक्त टपकै पीव ॥ गरीब , सूर स्वान के मुख बने , धड़ तो जिनकी देह । दस्तो जिनके गुर्ज हैं , मारे निर संदेह ॥ गरीब , स्याम वर्ण शंका नही , दागड दुम खलील । उरध चुंच मुख काग का , चिसमे जिनके नील ॥ गरीब , शक्ति सरुपी तन धरै , लघु दीरघ हो जाहिं । बाहर भीतर मार हैं , तन कूं बहु विधि खाहिं ॥ गरीब , कोटि-कोटि की जोट हैं , कोटि-कोटि एक संग । एका-एकी फिरत है , ऐसेभयंकर अंग ॥ . ॥.....जय हो बंदीछोड़ की.....सत साहेब सभी को.....॥
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गरीब, शीश कट्या मंसूर का, दोनों भुजा समेत। सूली चढ़या पुकारता, कदै न छाड़ो खेत।। गरीब, अनलहक्क कहता चला, मंसूर सूली प्रवेश। जाके ऊपर ऐसी बीती कैसा होगा वो देश।। विचार करने योग्य बात है कि कैसा होगा वह धाम (सतलोक)? जिसे पाने के लिए मंसूर ने शीश और दोनों भुजा के साथ साथ अपना शरीर टुकड़े टुकड़े करवा दिया लेकिन अपना मार्ग नहीं छोड़ा । जब जब किसी महापुरुष ने सत्य बोला है उसे संघर्ष ही झेलना पड़ा है। ऐसे ही अब संत रामपाल जी महाराज उस सतलोक की असली वास्तविकता से जन समाज को परिचित करवा रहे है और उसी के चलते ही उन्हें भी संघर्ष करना पड़ रहा है। लेकिन यह भी सत्य है संतों के काम कभी रुका नहीं करते।

परनारी पैनी छुरी, तीन ठौर से खाय। धन हरे, यौवन हरे, अंत नरक ले जाए।।

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परनारी पैनी छुरी, तीन ठौर से खाय। धन हरे, यौवन हरे, अंत नरक ले जाए।। परनारी पैनी छुरी, तीन ठौर से खाय।   धन हरे, यौवन हरे, अंत नरक ले जाए।। कबीर परमेश्वर ने कहा है :- कि नारियों को भगवान ने सुन्दर और मोहक बनाया है और पुरुषों का काम है कि उनके मोह में उलझे बिना अपना काम करें जिसने भी स्त्रियों के रूप जाल और मोहनी अदाओं पर अपने मन और नैनों को भटकाया उसका नाश तय है। कबीर परमेश्वर ने कहा है :- पर_नारी_पैनी_छुरी__मति_कोई_करो_प्रसंग !    रावण_के_दस_शीश_गये_पर_नारी_के_संग !! इस बात को हर कोई जानता है कि रावण ने पर स्त्री यानी भगवान राम की पत्नी सीता का हरण किया था ! परिणाम आपके सामने है कि रावण ने अपने एक लाख पुत्र व सवा लाख पौत्रों (नाती)के साथ अपने वंश का नाश करवा लिया ! इतिहास और पुराणों में इस तरह की कई कथाएं मौजूद हैं देवी अहिल्या पर कुदृष्टि रखने के कारण देवराज इन्द्र को अपना सिंहासन गवाना पड़ा था। वर्तमान में भी आपने ऐसी कई घटनाएं सुनी होगी की पर स्त्री सम्बंध के कारण कई परिवार तबाह हो गए इसलिए कबीर साहिब जी ने परस्त्रियों को पैनी छुरी कहा है क्योंकि ये कभी रोकर तो कभी हँ...

Kabir is supremegod

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                                EyeWitnessOfGod Complete God KavirDev (Supreme God Kabir), even prior to the knowledge of the Vedas, was present in Satlok, and has also Himself appeared in all the four yugas to impart His real knowledge. In Satyug by the name 'Satsukrit'; in Tretayug by name 'Muninder'; in Dwaparyug by the name 'Karunamay', and in Kalyug, appeared by His real name 'KavirDev' (God Kabir). Apart from this, He appears any time by acquiring different forms and after performing His leela (divine act), disappears. God-loving devout souls are unable to recognise the Supreme God who has appeared at that time to perform a divine act because all the so-called Maharishis and saints have described God as formless. In reality, God is in form. He has a visible human-like body. But God's body is not formed of the union of vessels made up of the five elements. It is made up of one elemen...
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मेरा नाम भूरा है... लोग डंडे ले कर मेरे पीछे भागते है... पत्थरो से मुझे मारते है... मुझे दर्द होता है... फिर मैं बहुत डर जाता हूं। फिर मैं सोचता हूं मैंने क्या गलत किया... मै तो भूखा-प्यासा खाने की उम्मीद मे ही तो आप इंसानों के आस-पास घूमता हूं... मुझे नही पता खाने के लिये पैसे चाहिये होते है l क्या प्यार काफी नही दो रोटी के लिये?? मेरे अंदर भी खून है, हड्डियां है, दिल है.. सच्ची बहुत दर्द होता है... मैं तो बता भी नहीं सकता ... प्लीज मुझे मत मारो। 😥😭 अगर रोटी देने की हैसियत नहीं है तो मारो भी मत साहब....।
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                    !! आम का पेड़ !! ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ एक समय की बात है गौतम बुद्ध किसी उपवन में विश्राम कर रहे थे। तभी बच्चों का एक झुंड आया और पेड़ों पर पत्थर मारकर आम तोड़ने लगा। तभी एक पत्थर बुद्ध के सिर पर लगा और सिर से खून बहने लगा। बुद्ध की आँखों में आंसू आ गये। बच्चों ने देखा तो भयभीत हो गये और उन्हें लगा कि अब बुद्ध उन्हें भला-बुरा कहेंगे। बच्चों ने उनके चरण पकड़ लिए और उनसे क्षमा याचना करने लगे। उनमें से एक बच्चे ने कहा, “हमसे भारी भूल हो गई है, हमारी वजह से आपको पत्थर लगा और आपके आंसू आ गये, हमें माफ़ कर दें अब हमसे ऐसी गलती नहीं होगी!” इस पर बुद्ध ने उन्हें समझाते हुए कहा, “बच्चों, मैं इसलिए दुःखी हूँ कि तुमने आम के पेड़ पर पत्थर मारा तो पेड़ ने बदले में तुम्हे मीठे फल दिए, लेकिन मुझे मारने पर मैं तुम्हें सिर्फ भय दे सका।” सच है महापुरुषों का जीवन केवल परमार्थ के लिए ही होता है, खुद को तकलीफ पहुँचने के बावजूद भी वे सिर्फ दूसरों की ख़ुशी के बारे में ही सोचते हैं और ऐसे लोग ही महामानव कहलाते हैं। शिक्षा:- हमें भी भगवान बुद...

Bodh Katha

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This is called dung worm, this worm wakes up in the morning in search of cow dung and keeps making shells of cow dung all day long.        By dusk, a good amount of cow dung is formed. Then he takes this cow dung ball to his bill, after reaching the bill, he realizes that the ball is made big but the hole of the bill is small, despite many efforts, it cannot go into the ball bill.  It is a matter of thinking that not all of us have become like dung worms. Pura Jeevan is so entangled in earning money  When the last time comes, it is known that all these things cannot go together, how many lives we had spent in its affair were not able to consume it, and in collecting it, how many people broke their ties, neither Could give time to you.  This cow dung can kill a man's money-earning worm, if he understands it honestly.  

कलयुग में सत्ययुग

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              कलयुग में सत्ययुग (सन्त रामपाल जी के सत्संग वचनों से उद्धृत) सत्ययुग उस समय को कहते हैं जिस युग में अधर्म नहीं होता। शांति होती है। पिता से पहले पुत्रा की मृत्यु नहीं होती, स्त्रा विधवा नहीं होती। रोग रहित शरीर होता हैं। सर्व मानव भक्ति करते हैं। परमात्मा से डरने वाले होते हैं क्योंकि वे आध्यात्मिक ज्ञान के सर्व कर्मों से परिचित होते हैं। मन, कर्म, वचन से किसी को पीड़ा नहीं देते तथा दुराचारी नहीं होते। जति-सति, स्त्रा पुरूष होते हैं। वृक्षों की अधिकता होती हैं। सर्व मनुष्य वेदों के आधार से भक्ति करते हैं। वर्तमान में कलयुग है। इसमें अधर्म बढ़ चुका है। कलयुग में मानव की भक्ति के प्रति आस्था कम हो जाती है या तो भक्ति करते ही नहीं यदि करते हैं तो शास्त्रा विधि त्याग कर मनमानी भक्ति करते हैं। जो श्रीमद् भगवत गीता अध्याय 16 श्लोक 23.24 में वर्जित हैं। जिस कारण से परमात्मा से जो लाभ वांछित होता है वह प्राप्त नहीं होता। इसलिए अधिकतर मनुष्य नास्तिक हो जाते हैं। धनी बनने के लिए रिश्वत, चोरी, डाके डालने को माध्यम बनाते हैं। परन्तु यह विधि धन लाभ की...

कर्म का जाल

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नीचे दिया गया चित्र एक मादा बिच्छु का है , इसकी अस्थिमज्जा पर मौजूद ये इसके बच्चे हैं, ये जन्म लेते ही अपनी मां की पीठ पर बैठ जाते हैं और उसके शरीर को ही खाना प्रारम्भ कर देते हैं, तब तक खाते हैं जब तक कि उसकी केवल अस्थियां ही शेष ना रह जाए। वो तङपती है , कराहती है , लेकिन ये पिछा नहीं छोङते , और पलभर में नही मार देते बलकि कई दिनों तक यह मौत से बदतर असहनीय पीङा को झेलती हुई दम तोङती है।  लख चौरासी के कुचक्र में ऐसी ऐसी असंख्य योनियां हैं , जिनकी स्थितियां अज्ञात हैं , कदाचित् इसीलिए भवसागर को अगम अपार कहा गया है।   ऋषिमत के मुताबिक यह भी इन्सानी जूनीं मे किए गये कर्मों का ही भुगतान है। इन्सान इस मनुष्य जीवन में जो कर्म करेगा , नाना प्रकार की असंख्य योनियों में इन कर्मों के आधार से ही उसे दुःख सुख मिलते रहेंगे।  Www.jagatgururampaljiorg.com   चलती चक्की देखकर दिया कबीरा रोय  दोय पाटन के बीच में, साबुत बचा ना कोय।

कैसे हो बलात्कार रूपी राक्षस का खात्मा?

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कैसे हो बलात्कार रूपी राक्षस का खात्मा? वर्तमान समय में यौन उत्पीड़न की घटनाएं अखबार के पन्नों पर और टीवी में सुर्खियों में रहती हैं। आए दिन लड़कियां कहीं ना कहीं इस घिनौनी वारदात का शिकार हो रही हैं। भारत में तो बलात्कार आम बात हो गई है। लगभग हर 22 मिनट में भारत में बलात्कार हो रहा है जो एक बहुत ही संवेदनशील विषय है। इस लोक में रहने वाले मनुष्य की वृत्ति भी वही है जो काल ब्रह्म की है। जिसने दुर्गा के साथ दुर्व्यवहार कर तीन पुत्रों की उत्पत्ति की। उसी प्रकार इस लोक में रहने वाले मनुष्यों पर भी वही प्रभाव पड़ रहा है। इसीलिए इसको छोड़कर हमें पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब की भक्ति करनी चाहिए जो सब प्रकार के विकारों से परे हैं। वर्तमान समय में स्वतंत्रता शब्द केवल कहने के लिए रह गया जिसका असल में अब कोई मतलब या मूल्य नहीं है। आज़ादी केवल नाम मात्र की है जबकि परिदृश्य बिल्कुल इसके विपरीत है। आज के समाज में घृणित कृत्यों जैसे शराब पीना, नशे करना, किसी की बहन बेटियों पर भद्दे कमेंट करना, परनारी स्त्री को गंदी नजर से देखना, बलात्कार जैसी अमानवीय घटनाओं का बढ़ना इत्यादि सब एक असभ्य समाज का चित्र है...

भक्ति क्यों करनी चाहिए

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हम बार-बार आपको भक्ति के बारे मे चेताते रहते है, आइए जानते है आखिर भक्ति क्यु करनी चाहिए:- आज आप भूख लगते ही अपनी सुविधा अनुसार भोजन कर लेते है, एक दिन भूखा रहकर देखिए क्या हाल होता है, और अब कुत्ते के जीवन के बारे में सोचिए जो एक टूक के लिए घर घर घूमता रेहता है और वो भी रेत मे गिरा हुआ खाता है और की बार वो भी ना मिले तो गंद खाके पेट की भूख को शांत करने की सोचता है। ऐसे ही आप छोटी सी खरोंच लगते ही तिलमिला उठते है, कुछ छोटी मोटी बीमारी या पेट में दर्द होते ही डॉक्टर के पास पहुच जाते है, अब एक गधे के जीवन को सोचिए जो दिन भर वजन ढोता है, लट्ठ भी खाता है, और कई बार घाव होने पर कौवे उसके घाव पर चोंच मार रहे है, उसके उपर वजन अलग से, तो सोचकर देखिए उस पीड़ा को और अंत मे खाने को गंद ही मिलता है। 👆ये सब हुआ उस मालिक की सही भक्ति ना करने के कारण, जिसके कारण हम ऐसी ऐसी चौरासी लाख योनियों में घूमते रहते है, और महा कष्ट उठाते है। अब आपको इस दुर्लभ समय मानव जीवन मिला है, तो क्यु ना इस मानव जीवन का फायदा उठाए और सही गुरु की तलाश करे, जिसकी पहचान हमारे धार्मिक ग्रंथो (गीता, वेद, पुराण) मे बतायी है, उ...

पितर पूजा निषेध

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www.jagatgururampaljiorg.com                 पितर पूजा निषेध संत रामपाल जी महाराज किसी प्रकार की पितर पूजा, श्राद्ध निकालना आदि कुछ नहीं करना है। भगवान श्री कृष्ण जी ने भी इन पितरों की व भूतों की पूजा करने से साफ मना किया है। गीता जी के अध्याय नं. 9 के श्लोक नं. 25 में कहा है कि - यान्ति, देवव्रताः, देवान्, पितऋन्, यान्ति, पितव्रताः। भूतानि, यान्ति, भूतेज्याः, मद्याजिनः, अपि, माम्। अनुवाद: देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होते हैं भूतों को पूजने वाले भूतों को प्राप्त होते हैं और मतानुसार पूजन करने वाले भक्त मुझसे ही लाभान्वित होते हैं। बन्दी छोड़ गरीबदास जी महाराज और कबीर साहिब जी महाराज भी कहते हैं । ‘गरीब, भूत रमै सो भूत है, देव रमै सो देव। राम रमै सो राम है, सुनो सकल सुर भेव।।‘‘ इसलिए उस(पूर्ण परमात्मा) परमेश्वर की भक्ति करो जिससे पूर्ण मुक्ति होवे। वह परमात्मा पूर्ण ब्र सतपुरुष(सत कबीर) है। इसी का प्रमाण गीता जी के अध्याय नं. 18 के श्लोक नं. 46 में है। यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ...

Gyan vardhak story

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🌹🙏 night story 🙏🌹  * The father and the son went for a walk together, they came out to the far fields, when the son saw that on the way, an old pair of shoes had landed, which ... probably the poor laborers working in the nearby farm. Were of   Son got a joke. He told father ~ Why not make this evening memorable with a little mischief, after all ... fun is the right source of joy. The father looked at the son with confusion.    Son said ~ We hide these shoes somewhere behind the bushes. When that laborer does not get scared here, it will be a lot of fun.  Father, after listening to the son, became serious and said ~ Son! Never make such a lewd joke with a poor and weak person with what they need. Things that have no value in your eyes are precious for the poor. You have to make this evening memorable, so come .. today we put some coins in these shoes and hide and see what effect it has on the laborer. The father did the same and both hid in the nearby ...

Dhan Teres

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Dhan Teres This festival is celebrated on the Trayodashi date of Kartik Krishna Paksha. Dhan Teres This festival is celebrated on the Trayodashi date of Kartik Krishna Paksha. It is a tradition to buy something new on this day. It is customary to buy brass and silver utensils. It is believed that whatever is purchased on this day has benefits. Money wealth increases. Therefore, Lakshmi is worshiped on this day. Dhanvantari also incarnated on this day, which is why it is called Dhan Teresa. Dhanvantari and Mata Lakshmi are among the fourteen gems received during the Samudra Manthan performed jointly by the gods and asuras. This date is also known as Dhantrayodashi. Why are utensils bought on Dhanteras  Dhanvantari appeared on the day of Trayodashi of Kartik Krishna Paksha by the sea churning. When Dhanvantari appeared, he had an urn full of nectar in his hands. Lord Dhanwantari appeared with the urn, therefore, it is a tradition to buy utensils on this day. Especially bra...